समकालीन क्षणिका ब्लॉग अंक-03/344 अगस्त 2024
सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!
शशि पाधा
01.
उसने जो खटकाई साँकल
सिहर उठा था माँ का आँचल
माँ की गोदी सर रख कर
न कौंधेगी, न गरजेगी
आज वो केवल बरसेगी.....
02.
तुम फूल बेचती हो
और
मैं मुस्कान ख़रीदने आता हूँ 
रेखाचित्र : प्रीति अग्रवाल
मेरे पास फूलों के लिए
रूपये नहीं
और तुम्हारी मुस्कान की
कोई कीमत नहीं
तुम यूँ ही फूल बेचो
मैं यूँ ही मुस्कान खरीदूँगा
कितना ख़ूबसूरत सौदा है न
हमारे बीच
- 174/3, त्रिकुटानगर, जम्मू-180012, जम्मू-कश्मीर
ईमेल : shashipadha@gmail.com



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