Sunday, September 26, 2021

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03 /195                        सितम्बर 2021

क्षणिका विषयक आलेखों एवं विमर्श के लिए इन लिंक पर क्लिक करें-

01. समकालीन क्षणिका विमर्श { क्षणिका विमर्श}
02. अविराम क्षणिका विमर्श {क्षणिका विमर्श}

रविवार  : 26.09.2021
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!  


पुष्पा  मेहरा 




01. 


सब तरफ़ खौफ़ का परचम 

लहरा रहा है 

नींद सपने देखना चाहती है 

मन उड़ान भरना चाहता है 

पर एक अज़ीब से बवंडर ने 

पैरों को जकड़ रखा है 

पीड़ा और दर्द पी-पीकर 

शब्द भी बिफरने लगे हैं।


02.

रेखाचित्र : मॉर्टिन जॉन 

हौले से बसंत ने दस्तक क्या दी 

मन में राग जगा 

मधुबन बाग-बाग हुआ 

चिरैयों ने पंख खोले 

धरती पर स्वर्ण उड़ा।

  • बी-201, सूरजमल विहार, दिल्ली-92/फ़ोन 011-22166598

Sunday, September 19, 2021

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03 /194                        सितम्बर 2021

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रविवार  : 19.09.2021
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है! 


हरिश्चन्द्र शाक्य




01. निकलती चुहिया


आम आदमी की 

ज़िन्दगी का

बस इस तरह

चल रहा पहिया,

खोदता पहाड़

निकलती चुहिया!


02. कागज की नाव


पर्वत-सा भार

यदि होगा

काग़ज की 

नाव पर सवार

डूबना निश्चित,

वर्तमान खतरे में

भविष्य अनिश्चित!

रेखाचित्र : बी मोहन नेगी 


03. एक झूठ


एक झूठ

सत्य की

राह में अड़ा

सौ-सौ सत्यों पर

भारी पड़ा!

  • शाक्य प्रकाशन, घण्टाघर चौक,  क्लब घर, मैनपुरी-205001, उ.प्र./मो. 09411440154

Sunday, September 12, 2021

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03 /193                        सितम्बर 2021

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रविवार  : 12.09.2021
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

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कंचन अपराजिता






01.

        

दिल के दर्द की बात 

क्या लिखूँ

मजदूर की भूख के आगे

सब गम फीके हैं।


02.


नंगे पाँव

जख्मी मन

मीलों का सफर 

क्या इससे भी कठिन 

होती है कोई डगर!


चित्र : प्रीति अग्रवाल 
03.


उम्मीदों के 

पूर्ण होने का

इंतजार इतना लंबा हो गया।

दर्द की फेहरिस्त

बढ़ती गयी।

  • 39/1ए सिन्दूर ग्रीन पार्क, जयचन्द्रन नगर, पालीकरनाय, चेन्नई-600100, त.नाडु
  • (39/1, Sindur green park, Jayachandran Nagar, Pallikarnai, Chennai-600100, T. Nadu) 

Sunday, September 5, 2021

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03 /192                        सितम्बर 2021

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रविवार  :  05.09.2021
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

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अनीता ललित  




01.

भावनाओं का हिलोरे मारता सागर...

क्यूँ हो गया जड़...

तेरा अंतर्मन...?

समेट लो, सिमट लो...

इन लहरों के अंदर....

क्या जाने... किस ओर बह जाए फिर जीवन...


02.

तुम अगर साथ दो...

तो दुनिया से जीत सकती हूँ मैं....

तुमने मुँह मोड़ा....

तो खुद से ही हार जाती हूँ....


छायाचित्र  : उमेश महादोषी 

03. बचपन है...

बना लो चाहे जितना...

ऊँट घोड़ा पालकी...!

जिंदगी है...

वसूलेगी कर्ज...

तोड़कर कमर..

हर गुजरते साल की...!

  • 1/16, विवेक खंड, गोमतीनगर, लखनऊ-226010, उ.प्र.