समकालीन क्षणिका ब्लॉग अंक-03 / 74 जून 2019
01. समकालीन क्षणिका विमर्श { क्षणिका विमर्श }
02. अविराम क्षणिका विमर्श { क्षणिका विमर्श }
रविवार : 02.06.2019
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।
सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!
बलराम अग्रवाल

01.
काँप गया है
पेड़ समूचा इसी बात से
कैसे
पत्ता गिरा शाख से।
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| रेखाचित्र : अनुभूति गुप्ता |
02.
रश्मियों के जाल
बुनता-भेजता जो
सूर्य के
उस पार भी एक देश है।
- एम-70, उल्धनपुर, दिगम्बर जैन मन्दिर के पास, नवीन शाहदरा, दिल्ली/मो. 08826499115













