Sunday, June 2, 2019

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका            ब्लॉग अंक-03 / 74                 जून  2019


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रविवार : 02.06.2019

        ‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।
       सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!


बलराम अग्रवाल 








01.

काँप गया है
पेड़ समूचा इसी बात से
कैसे
पत्ता गिरा शाख से।
रेखाचित्र : अनुभूति गुप्ता

02.

रश्मियों के जाल 
बुनता-भेजता जो
सूर्य के
उस पार भी एक देश है।       


  • एम-70, उल्धनपुर, दिगम्बर जैन मन्दिर के पास, नवीन शाहदरा, दिल्ली/मो. 08826499115

Sunday, May 26, 2019

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका            ब्लॉग अंक-03 / 73                 मई 2019


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रविवार : 26.05.2019

        ‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।
       सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!

सुरेन्द्र वर्मा




01. कैसे पता चलता है?
अकेला होता हूँ
तो दूरभाष का इंतजार करता हूँ
पर तुम्हें
कैसे पता चलता है
मैं इन्तजार करता हूँ!

02. अनुपस्थिति

तुम हमेशा मेरे पीछे-पीछे चलीं
लेकिन एक बार
आश्वस्त होने के लिए
जब मैंने लौटकर देखा
तुम अनुपस्थित थीं

03. अपनी निगाहों से
छाया चित्र : डॉ. सुरेन्द्र वर्मा 
Iमैंने हर बार चाहा
कि अपनी अनुपस्थिति के लिए 
तुम्हें सफाई दूँ
लेकिन तुमने हर बार
अपनी निगाहों से उसे
निरस्त कर दिया

  • 10, एच.आई.जी.; 1-सर्कुलर रोड, इलाहाबाद (उ.प्र.) / मोबाइल : 09621222778

Sunday, May 19, 2019

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका            ब्लॉग अंक-03 / 72                 मई 2019


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रविवार : 19.05.2019

        ‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।
       सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!


शिव डोयले







01. बरसात

नदी 
नहीं बदलती 
अपनी गति
अपनी लय
यह बात 
अलग है
बादल कहीं 
धोखा न करे

02. फागुन-01

निखरा जब
सरसों का रंग
गेहूँ ने
लिख दिए छंद
फागुन ऐसा झूमा
ऐसा झूमा
महक उठी 
छायाचित्र :
अभिशक्ति गुप्ता 
महुए की गंध

03. फागुन-02

देखकर 
नीम का 
नया रूप
आम बौराया
पलाश लगा गाने
फागुन आया
फागुन आया

  • 19, झूलेलाल कॉलोनी, हरीपुरा, विदिशा-464001, म.प्र./मो. 09685444352

Sunday, May 12, 2019

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका            ब्लॉग अंक-03 / 71                मई 2019


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रविवार : 12.05.2019

        ‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।
       सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!


सुरेश सपन









01.

पहले पत्थरो से लड़ी
फिर उनकी रज से,
नहीं लड़ पाई
आदमी के लालच से 
विष्टा से भरी/अब
नदी बहुत बीमार रहती है 
पर देखो जिजीविषा उसकी- 
छायाचित्र : उमेश महादोषी 

नदी अब तक बहती है।

02. 

कहीं हवा बनायी जाती है,
और कहीं बिगाडी जाती है।
यह कैसा खेल
खेल रहे हैं हम
अपनी ही साँसों के साथ।

  • डॉ. सुरेश पाण्डेय, प्रधान वैज्ञानिक, विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा, उ.खंड /मो. 9411333269 

Sunday, May 5, 2019

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका            ब्लॉग अंक-03 / 70               मई 2019


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रविवार : 05.05.2019

        ‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।
       सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!



महावीर रवांल्टा




01. कमीज

मैंने पसीने से तर
कमीज को 
निचोड़ना चाहा
लेकिन क्या देखता हूँ कि
खून का
एक-एक कतरा निकल रहा है

02. चाहत

मैं भौंरा बनकर
फूलों पर
मंडराना चाहता था
छायाचित्र : उमेश महादोषी 

मगर/चाहने तक
फूल मुरझा चुके थे

03. प्रेम

बढ़ती हुई घास की तरह
वे परस्पर
उलझते गए
लेकिन बड़े होते ही
पेड़ों की तरह
अलग-अलग सीधे होने लगे

  • ‘सम्भावना’ महरगॉव, पत्रा.- मोल्टाड़ी, पुरोला, उत्तरकाशी-249185, उत्तराखण्ड

Sunday, April 28, 2019

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका            ब्लॉग अंक-03 / 69               अप्रैल 2019

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रविवार : 28.04.2019

        ‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।
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ज्योत्स्ना प्रदीप






01.

कल
लोगों से
अपने दोस्त का
पूछा पता था 
हर आँख में
क्यों शक़ का
धुआँ था !

02.

समय
ये रंग भी
दिखलाता है
लोगों से घिरा
शख़्स ही
रेखाचित्र : डॉ. सुरेंद्र वर्मा 
तन्हाई की ग़ज़ल
गाता है!!

03.

गुलाब का अंदाज़
बड़ा सरीखा
हँसकर 
शबनमों को
छुपाने का हुनर
न जानें उसने
कहाँ से सीखा!

  • मकान-32, गली नं. 09, न्यू गुरुनानक नगर, गुलाब देवी हॉस्पिटल रोड, जालंधर-144013, पंजाब/मो. 07340863792

Sunday, April 21, 2019

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका            ब्लॉग अंक-03 / 68               अप्रैल 2019


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रविवार : 21.04.2019

        ‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।
       सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!



सुरेन्द्र वर्मा








01. टूटता है तारा

चाँद की तरह
रेख बनाता हुआ प्रकाश की
धीरे धीरे अस्त नहीं होता
अचानक कहीं टूटता है तारा
चीर जाता है छाती आकाश की

02. कैक्टस

एक अरसे बाद
उस पर एक फूल खिला
रेखाचित्र : डॉ. सुरेंद्र वर्मा 
कैक्टस पर कटीला
मैं अपना कटाक्ष 
भूल गया!

03. सांध्य बेला में

जीवन भर छिपाता रहा
कहा भी तो सिर्फ संकेत से
लेकिन इस सांध्य बेला में
अब कोई बाधा नहीं है
कथन सहज हो गए हैं


  • 10 एच आई जी, 1, सर्कुलर रोड, इलाहाबाद-211001, उ.प्र./मो. 09621222778

Sunday, April 14, 2019

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका            ब्लॉग अंक-03 / 67               अप्रैल 2019


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रविवार : 14.04.2019

        ‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।
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पुष्पा मेहरा 






01. 

ऊँची से ऊँची सीढ़ियाँ चढ़ना, 
गहरी-गहरी खाइयाँ फाँदना
मेरी आदत हो गई है,
लोग कहते हैं-
‘तुम निडर हो गई हो...‘

02.  

हथौड़े ही तो थे 
इस्तेमाल के तरीक़े थे कि
रेखाचित्र : राजेंद्र परदेसी 
एक ने ताला तोड़ा  
दूसरे ने,
आग में तपे लोहे पर वार कर, 
उसे नया आकार दिया!!

03. 

बबूल से तो बचकर निकल गई 
पर चलती सड़क पर 
विषधरों से बचना
थोड़ा मुश्किल लगा... 

  • बी-201, सूरजमल विहार, दिल्ली-92/फ़ोन 011-22166598


Sunday, April 7, 2019

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका            ब्लॉग अंक-03 / 66               अप्रैल 2019


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रविवार : 07.04.2019

        ‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।
       सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!



ज्योत्स्ना प्रदीप 







01.
पहाड़ों पर 
किसी ने 
सुन्दर चित्र बनाया था 
फिर उस पर 
लहू कैसे उतर आया था !

02.

ताबूत की छाती 
ग़मगीन थी 
अभी देखना था 
उसे 
कई कालेजों को 
रेखाचित्र : कमलेश चौरसिया 
फटते हुए !


03. इन्तज़ार 

ख़ौफ़ से टूटते 
पत्ते चिनार के 
ढूँढ रहे है 
आज भी निशाँ 
प्यार के !!

  • मकान-32, गली नं. 09, न्यू गुरुनानक नगर, गुलाब देवी हॉस्पिटल रोड, जालंधर-144013, पंजाब/मो. 07340863792