Sunday, September 1, 2024

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-03/348                  सितम्बर 2024 

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01. समकालीन क्षणिका विमर्श {क्षणिका विमर्श}
02. अविराम क्षणिका विमर्श {क्षणिका विमर्श}

रविवार  : 01.09.2024
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!  



विभा रश्मि





01.


मधुपान करूँ

सब्ज़ बगिया की 

फूलवती झाड़ियों में

शहद घोल दूँ

कर्ण-रंधों में प्रकृति के 

परोपकारी 

हमिंग वर्ड मैं।


02.

   

कर्णरंध्रों में मेरे

फूँके है कौन मंत्र 

और

प्राणवायु स्नायु 

ऑक्सीजन 

नासिका रन्ध्रों में। 


03.

चित्र : प्रीति अग्रवाल 


तमन्नाओं की खेती 

दिल में कर ,

निज के

स्वप्निल संसार को

मूर्त रूप देने से 

कभी न डर 

ओ निडर !!

  • एस-1/303, लाइफस्टाइल होम्स, होम्स एवेन्यू, वाटिका इण्डिया नेक्स्ट, सेक्टर 83, गुड़गाँव-122004, हरि./मोबा. 09414296536 

Sunday, August 25, 2024

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-03/347               अगस्त 2024 

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रविवार  : 25.08.2024
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है! 


वीणा शर्मा वशिष्ठ





01. प्रेम


वह प्रेम ही तो है 

जो अब तक 

शेष हो तुम...  

मेरी स्मृतियों में। 


02. शीत

छायाचित्र : उमेश महादोषी 


शीत में 

जम जाती है 

प्रकृति

नहीं जमता तो प्रेम 

प्रेम...

उछलता है, 

गुनगुनाता है, 

बहता है 

एक-दूसरे के दिल में।  

  • 597, सेक्टर-8, पंचकूला-134109, हरियाणा/मो. 07986249984

Sunday, August 18, 2024

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-03/346               अगस्त 2024 

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रविवार  : 18.08.2024
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!


अशोक आनन





01.


पेड़ !

जिस हवा ने -

ग़रीबों के आशियाने उजाड़ने में

ज़रा भी न सोचा ।

आज

उसी हवा ने -

रेखाचित्र : कमलेश चौरसिया 
तुझे उजाड़ दिया।


02. दीया

जिसने भी-

अँधेरा जिया है

उसके लिए-

सूरज से बढ़कर

‘दिया’ है

  • 11/82, जूना बाज़ार, मक्सी, जिला शाजापुर-465106, म.प्र. 

Sunday, August 11, 2024

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-03/345               अगस्त 2024 

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रविवार  : 11.08.2024
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

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रमा द्विवेदी





01.


रेखाओं की भी, 

होती है एक इबारत,

पढ़ सको तो पढ़ लेना।


02.


रेखाएँ!

सोच-समझ कर खींचना

ये अभिशाप भी बन सकती हैं

और

रेखाचित्र : कमलेश चौरसिया 

वरदान भी।


03.


हस्त रेखाएँ,

बताती हैं भाग्य, लेकिन

क्या कोई सच में,

इन्हें पढ़ पाया है!

  • फ़्लैट नं.102, इम्पीरिअल मनोर अपार्टमेंट, बेगमपेट, हैदराबाद-500016/मो. 09849021742 

Sunday, August 4, 2024

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-03/344                 अगस्त 2024 


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रविवार  : 04.08.2024
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शशि पाधा 





01.


उसने जो खटकाई साँकल

सिहर उठा था माँ का आँचल 

माँ की गोदी सर रख कर 

न कौंधेगी, न गरजेगी

आज वो केवल बरसेगी.....


02.


तुम फूल बेचती हो 

और 

मैं मुस्कान ख़रीदने आता हूँ 

रेखाचित्र : प्रीति अग्रवाल 

मेरे पास फूलों के लिए 

रूपये नहीं 

और तुम्हारी मुस्कान की 

कोई कीमत नहीं 

तुम यूँ ही फूल बेचो 

मैं यूँ ही मुस्कान खरीदूँगा

कितना ख़ूबसूरत सौदा है न 

हमारे बीच

  • 174/3, त्रिकुटानगर, जम्मू-180012, जम्मू-कश्मीर

ईमेल : shashipadha@gmail.com 

Sunday, July 28, 2024

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-03/343                जुलाई 2024 

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रविवार  : 28.07.2024
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नरेश कुमार उदास





01.


प्रेम 

न देखे

रंग-रूप

प्रेम 

न देखे 

जात-पात

प्रेम में है

यही विशिष्ट बात!


02.


औरत की जिंदगी

रेखाचित्र : बी मोहन  नेगी 
बदलने के लिए

दुनिया बेताब है

फिर भी 

नहीं बदली है

अभी तक

औरत की दुनिया!

  • अकाश-कविता निवास, लक्ष्मीपुरम, सै. बी-1, पो. बनतलाब, जि.  जम्मू-181123 (ज-क)/मो. 09419768718 

Sunday, July 21, 2024

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-03/342                जुलाई 2024 

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रविवार  : 21.07.2024
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

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केशव शरण





01. बयान


एक आदमी 

बयान देता है

और सब देने लगते हैं बयान


एक आदमी 

बलिदान देता है

और चुप हो जाते हैं सब


02. चार दिन और


चार दिन और

चिड़ियों को निहार लो

वे क्या कह रही हैं

रेखाचित्र : प्रीति अग्रवाल 
कॉपी में उतार लो

फूलों और पेड़ों के चित्र

चित्त में संवार लो


चार दिन और

फिर रेगिस्तान में बहार लो

  • एस 2/564 सिकरौल वाराणसी-221002/मो. 09415295137

Sunday, July 14, 2024

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-03/341                जुलाई 2024 

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रविवार  : 14.07.2024
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चक्रधर शुक्ल




01.


जिन्दगी से

खिलवाड़ करना जारी,

युद्ध की विभीषिका सामने है

आगे

परमाणु बम की तैयारी!


02.

रेखाचित्र : कमलेश चौरसिया 


जंग

एक झटके में 

कितनों को लील जाएगी,

गुस्सा ठंठा पड़ने केबाद

आपको यह बात

तब समझ में आएगी!

  • एल.आई.जी.-1, सिंगल स्टोरी, बर्रा-6, कानपुर-208027(उ.प्र)/ मो. 09455511337

Sunday, July 7, 2024

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-03/340                जुलाई 2024 

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रविवार  : 07.07.2024
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परमेश्वर गोयल





01.


व्यंग्य 

बन्दूक नहीं 

अलार्म घड़ी है,

कहता है जागो 

विषम घड़ी है! 


02.

चित्र : प्रीति अग्रवाल 

हाथ बेटी के 

पीले करने में 

स्वयं सफेद हो गया,

मकान पुरखों का 

देखते-देखते खो गया!

  • गुलाब बाग, पूर्णिया- 854326, बिहार