Sunday, April 18, 2021

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03 /172                     अप्रैल 2021

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01. समकालीन क्षणिका विमर्श { क्षणिका विमर्श}
02. अविराम क्षणिका विमर्श {क्षणिका विमर्श}

रविवार  : 18.04.2021
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!  

 

शैलेष गुप्त ‘वीर’



01.


उदासी को डस्टबिन में

फेंक कर

चंदा और सूरज

ख़ुशियों की आइसक्रीम

साथ-साथ खायेंगे,

हमेशा मुस्कुरायेंगे!


02.


इधर हृदय-थाल में 

रेखाचित्र : मॉर्टिन जॉन 

रोली-कुमकुम-अक्षत है,

उधर दुर्घटना 

और बहू का

हर सपना

क्षत-विक्षत है!

  • 24/18, राधा नगर, फतेहपुर-212601, उ.प्र./मो. 09839942005

Sunday, April 11, 2021

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03 /171                     अप्रैल 2021

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रविवार  : 11.04.2021
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!  


नरेश कुमार उदास





01.


जब भी आइने में 

देखता हूँ अपना चेहरा

तो डर जाता हूँ

अपने भीतर 

और बाहर के रूप में

अन्तर देखकर!


02.


ओस से नहाती है

जब दूब

मेरे मन में

खुशी होती है खूब।


03.

छायाचित्र : उमेश महादोषी 

इन्द्रधनुष के रंगों से 

आकाश रंगीन हो उठा

और मेरा मन भी

रंगीन सपनों के

ताने-बाने बुनने लगा।

  • अकाश-कविता निवास, लक्ष्मीपुरम, सै. बी-1, पो. बनतलाब, जि.  जम्मू-181123 (ज-क)/मो. 09419768718 

Sunday, April 4, 2021

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03 /170                        अप्रैल 2021

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रविवार  : 04.04.2021
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!  


रमेशकुमार भद्रावले



01. स्पर्श 

पारस,

तो, आज-कल

शहर भी,

होते हैं,

जमीं को

छू लें 

तो,

सोना बना

देते हैं!

02. मुआवजा

कीड़ा 

आम की गुठली में

क्या निकल गया

गुठली को

मुआवजे का

हक मिल गया!

03. सायफन

पानी और आदमी का

पल-पल का साथ है,

छाया चित्र : प्रीति अग्रवाल 

काश,

पानी का सिर्फ एक गुण

आदमी में आ जाता,

आज,

आदमी,आदमी की सतह

बराबर कर पाता!

  • गणेश चौक, हरदा, म.प्र./मो. 09926482831

Sunday, March 28, 2021

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03 /169                      मार्च 2021

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रविवार  : 28.03.2021
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सुनीता काम्बोज




01.

रोज राजनीतिक वादों

किताब पढ़ता हूँ

बेरोजगारी से लड़ता हूँ

नींद की गद्दारी के कारण

अब सपने भी नहीं आते

कोई हुक्मरानों को 

खबर कर कर दो

वो हमें

नींद की एक गोली

क्यों, नहीं दे जाते?


02.


अधूरी प्रेम कथाएँ

बाँचता जमाना

इसलिए छोड़ चले हम

अधूरी अपनी प्रेमकहानी।


03.


डाली प्रेम करती है

फूलों से पत्तियों से

रेखाचित्र : डॉ. संध्या तिवारी 
पर उन्हें गिरने से

नहीं सकती रोक

तुम्हें कैसे रोकूँ

गिरने से?

  • मकान नंबर-120, टाइप-3, जिला संगरूर, पंजाब

Sunday, March 21, 2021

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03 /168                      मार्च  2021

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रविवार  : 21.03.2021
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

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भावना कुँअर




01. पहरे


मेरी आँखों पर

इतने पहरे

पहले तो न थे

देख सकती थी मैं भी

खूबसूरत ख़्वाब

पर अचानक क्या हुआ...

जो निकाल ली गई

इनकी रोशनी

और अब तो ये

रो भी नहीं सकती।


02. स्याह धब्बे


आँखों के नीचे

दो काले स्याह धब्बे 

आकर ठहर गये

चित्र : प्रीति अग्रवाल  
और नाम ही नहीं लेते

जाने का

न जाने क्यों 

उनको

पसंद आया 

ये अकेलापन। 

  • सिडनी, आस्ट्रेलिया
  • भारत में : द्वारा श्री सी.बी.शर्मा, आदर्श कॉलोनी, एस.डी.डिग्री कॉलिज के सामने, मुज़फ़्फ़रनगर (उ.प्र.) 
  • ईमेल :  bhawnak2002@gmail.com

Sunday, March 14, 2021

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03 /167                       मार्च 2021

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रविवार  : 14.03.2021
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रजनी साहू




01. 


विपत्ति वो छन्नी है

जो पराया और अपना 

निथार देती है

अपनों का प्यार और

पराये का बहिष्कार कर देती है

ये चवन्नी, अट्ठन्नी की छन्नी


रेखाचित्र : रीना मौर्या मुस्कान 
02.


फिर वही तलाश

एक खत्म होने पर

दूजे की आस

जीवन है हताश

  • बी-501,कल्पवृक्ष सीएचएस, खण्ड कॉलौनी, सेक्टर 9, कॉर्पाेरेद्वान बैंक के पीछे, प्लाट नं. 4, न्यू पानवेल (पश्चिम)-410206, नवी मुंबई, महाराष्ट्र/मो. 09892096034

Sunday, March 7, 2021

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03 /166                      मार्च 2021

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रविवार  : 07.03.2021
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

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(स्व.) अमन चाँदपुरी 




01. मोह-माया

नदी का पानी बहता रहता है

सारी मोह-माया त्यागकर

लेकिन,

बहने का मोह 

कभी त्याग नहीं पाया।

02. साहित्य

कुछ साहित्य

समय-शिला पर ही

छोड़ देते हैं अपनी छाप

कुछ

भविष्य-भविष्य चिल्लाते हैं

अमर होने के लिए

फिर भी

मौन रह जाते हैं।

03. मृत्यु

आज नहीं

कल नहीं

परसों भी नहीं

तुम मुझसे मिलने

आना ही नहीं।

04. तलाश

ख़ुद की तलाश में

रेखाचित्र : मॉर्टिन जॉन 

नोंच डाला मैंने

अपना ही बदन।

05. आज़ाद

रूह ने सुना दी

जिश्म को सज़ा-ए-मौत

और खुद हो गई आज़ाद।

  • परिवार का पता: ग्राम व पोस्ट- चाँदपुर प टांडा, जिला- अम्बेडकर नगर-224230, उ.प्र./मो. 09721869421

Sunday, February 28, 2021

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03 /165                      फरवरी 2021

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रविवार  : 28.02.2021
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शील कौशिक





01. पीड़िता


किसी के लिए वह किस्सा भर था

पर उसके जीवन का हिस्सा था

उसकी जड़ों का हिलना

काँपते रहने था जीवन भर


02. वह


प्रशंसकों से घिरा

महफ़िल में डोलता है

चुप रह कर भी

वह कितना बोलता है


रेखाचित्र : कमलेश चौरसिया 
03. मन


मन के अंदर

कई मन हो जाते अंकुरित

कितने ही रूप और अहसास

हो जाते तरंगित

  • मेजर हाउस नं. 17, हुडा सेक्टर-20, पार्ट-1, सिरसा-125055, हरि./मो. 09416847107

Sunday, February 21, 2021

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03 /164                      फरवरी 2021

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‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

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नलिन




01.

त्यागभूमि यह, भागभूमि यह

हम सच्चे साधो हैं

हम मिटटी में पले बढ़े हैं

मिटटी के माधो हैं


रेखाचित्र : अनुभूति गुप्ता 
02.

कुहरे के परकोटे 

उनके भीतर मैं हूँ

पंख उग गये मेरे

जब से बाहर देखा

खड़े हुए धुँधलाए

मैंने अपने कल को

  • 4 ई 6 , तलवंडी , कोटा - 324005 , राजस्थान , मो. 094139 87457

Sunday, February 14, 2021

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03 /163                      फरवरी 2021

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रविवार  : 14.02.2021
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

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 चक्रधर शुक्ल




01.


समय के पहले 

कुछ नहीं हो पाया ,

अभिमानी ने 

घर 

सर पर उठाया!


02.


प्रकृति से

खिलवाड़ 

महँगा पड़ा,

खुले में 

रहना पड़ा!


03.


पुरखों को

याद कर

संस्कारों को जीता,


कर्म करते रहो 

रेखाचित्र : (स्व.) बी.मोहन नेगी 

सिखलाती गीता!


04.


नदी में 

बाँध बनाकर

प्रवाह को 

थामने की चुनौती,

प्रलय

अहंकार को तोड़ती 

मिट्टी को रौंदती!

  • एल.आई.जी.-1, सिंगल स्टोरी, बर्रा-6, कानपुर-208027(उ.प्र)/ मोबाइल : 09455511337