समकालीन क्षणिका ब्लॉग अंक-03/353 अक्टूबर 2024
सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!
रमेश कुमार भद्रावले
1. झटका
इस वर्ष,
सारे कौवों ने
सोलह दिन का
उपवास रख लिया,
शायद उन्होंने,
बच्चों से पीड़ित
माँ-बाप का
दर्द समझ लिया,?
2. पित्तर
खाकर खीर पूड़ी,
रेखाचित्र : (डॉ.) सुरेंद्र वर्मा
कौआ-बोला-
आजकल हमारा
पेट दुःखता है,
पहले और आज के
बेटों-में
हमें नीयत का
अन्तर दिखता है?
- गणेश चौक, हरदा, म.प्र./मो. 09926482831






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