समकालीन क्षणिका ब्लॉग अंक-04/371 फरवरी 2025
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02. अविराम क्षणिका विमर्श {क्षणिका विमर्श}
रविवार : 09.02.2025
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।
सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!
अलका गुप्ता
01.
मेहनत के खेत में
खरपतवार तो उगती ही हैं,
उन्हें उखाड़ फेंको तो
अच्छी फसल अवश्यम्भावी है।
02.
दुनिया देखने निकले थे
धुएँ का गुब्बार मिला।
मिले तो रंग बहुतेरे पर
स्वार्थ का रंग
चटक लाल मिला
छिप नहीं सकते तुम
अपने ही मन से
और मन के अंतर्द्वंद्व से
किए गये पुण्य से
या फिर पाखंड से
कुछ भी हो,
तुम छिप नहीं सकते।
- द्वारा श्री प्रदीप गुप्ता, सी-24, थर्ड फ्लोर, इन्द्रा एन्क्लेव (निकट इग्नू), नेब सराय, नई दिल्ली-110068/
/मो. 08920425146
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