समकालीन क्षणिका खण्ड-01 अप्रैल 2016
क्षणिका की लघु पत्रिका ‘समकालीन क्षणिका’ के खण्ड अप्रैल 2016 में प्रकाशित मिथिलेश दीक्षित जी की क्षणिकाएँ।
मिथिलेश दीक्षित
01. प्रेम-करुणा की बहाता धार, ममता से भरा यह हृदय उच्च, उदार फिर क्यों मान जाता हार! 02. उस समन्दर में अगर हम झाँक पायेंगे, तो निश्चित ही किसी से कम न खुद को आँक पायेंगे! 03. शब्द में
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रेखाचित्र : मनीषा सक्सेना |
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