Sunday, September 24, 2023

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03/299                     सितम्बर  2023 

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01. समकालीन क्षणिका विमर्श { क्षणिका विमर्श}
02. अविराम क्षणिका विमर्श {क्षणिका विमर्श}

रविवार  : 24.09.2023
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!   


ज्योत्स्ना  प्रदीप




01. वो छोटी-सी लड़की


महानगर की

वो छोटी-सी लड़की

पता भी न चला...

जाने कब

बड़ी हो गई?

किसी विरोध में

भीड़ के साथ

वो भी खड़ी हो गई!


02. वार

रेखाचित्र : उमेश महादोषी 


जब कोई

ज़रूरत से ज्यादा

सर नीचा करके

व्यवहार करता है,

याद रखना

साँप झुककर ही

वार करता है।

  •  ईमेल :  jyotsanapardeep@gmail.com / मो. 07340863792 

Sunday, September 17, 2023

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03/298                     सितम्बर  2023 

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रविवार  : 17.09.2023
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!  



केशव शरण






01. रामलीला


सीता को समाना है

भू में

राम को समाना है

सरयू में

लेकिन देखता हूँ कि

रामलीला हो गयी समाप्त

राजगद्दी 

और नगर-भ्रमण के पश्चात


02. सिर्फ़ कहने को

रेखाचित्र : कमलेश चौरसिया 

जिस चाँद  को

अब निहार पा रहा हूँ 

वह अब भी सुदूरतर है


सिर्फ़ कहने को

पीली कोठी की मुंडेर पर है

  • एस 2/564 सिकरौल वाराणसी-221002/मो. 09415295137

Sunday, September 10, 2023

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03/297                     सितम्बर  2023 

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रविवार  : 10.09.2023
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

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कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’




01. जिंदगी


जिस शिद्दत से देखते हो

तुम मेरा चेहरा,

काश! जिंदगी भी

उतनी ही कशिश-भरी होती!


02. मिलन में भी


प्रेम की पराकाष्ठा

तुमसे लिपटी हुई

तुम्हारे पास ही होती हूँ

तब भी तुम्हारी ही

याद में रोती हूँ।


03. हे प्रिय


हे प्रिय!

रेखाचित्र : शशिभूषण बड़ोनी 

पुस्तकालय की पुस्तक-सी मैं

शीशे की सुन्दर बुक रैक में कैद

तुम मॉडर्न युग के पाठक से

पूरा संसार लिये मोबाइल हाथ में

किन्तु, मेरे चेहरे पर लिखे

शब्दों को पढ़ना तो दूर

मुझ पर पड़ी- धूल भी नहीं झाड़ते!


  • II S-3, B.T. HOSTEL, UNIVERSITY CAMPUS, MADHI CHAURAS, P.O. KILKILESHWAR, TEHRI,Garhwal- 249161 Uttarakhand

Sunday, September 3, 2023

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका                      ब्लॉग अंक-03/296                     सितम्बर  2023 

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रविवार  : 03.09.2023
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

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रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’






01.

तन पर

डिग्रियों का बोझ

पीठ झुकी

सामने 

लम्बी अँधेरी गली।


02.

रेखाचित्र : कमलेश चौरसिया 

एक चादर थी अभावों की

हमारे पास

वह भी खो गई।

इतने दिनों में सूरतें सब

बहुत अजनबी

हो गई।

  • 1704-बी, जैन नगर, गली नं. 4/10, कश्मीरी ब्लॉक, रोहिणी सैक्टर-38, कराला, दिल्ली-110081/मो. 09313727493