Sunday, July 16, 2017

खण्ड-2 के क्षणिकाकार-14

समकालीन क्षणिका             खण्ड/अंक-02                   अप्रैल 2017



रविवार  :  15.07.2017

क्षणिका की लघु पत्रिका ‘समकालीन क्षणिका’ के अप्रैल 2017 में प्रकाशित खण्ड-2 में शामिल श्री लालित्य ललित जी की क्षणिका।


लालित्य ललित




01.
तुम्हारे आने से
या
ना
आने से
कभी भी फरक नहीं पड़ा
यह दस्तक तो
कब की लग गई
धमक अभी बाकी है

02.
तुम्हें
महसूस करना
मेरी मजबूरी नहीं
मेरी रूहानी आवाज है
छायाचित्र : बलराम अग्रवाल 
कभी-कभी
सूफियाना गाने को मन करता है

03.
रोने का अर्थ
यह बिल्कुल नहीं कि
वह तुम्हारे प्रेम में
पागल है
कंकर गिर गया
इसलिए बेचैन है...

  •  सहा. संपा. (हिन्दी), नेश. बुक ट्रस्ट., नेहरू भवन, इन्स्टी. एरिया फेस-2, वसंत कुज, दिल्ली-70

No comments:

Post a Comment