Sunday, October 8, 2017

खण्ड-2 के क्षणिकाकार-37

समकालीन क्षणिका             खण्ड/अंक-02                   अप्रैल 2017



रविवार  :  08.10.2017

क्षणिका की लघु पत्रिका ‘समकालीन क्षणिका’ के अप्रैल 2017 में प्रकाशित खण्ड-2 में शामिल सुश्री सपना मांगलिक जी की क्षणिका।


सपना मांगलिक




01.
काव्य सृजन
यानि ठंडे रिश्ते
जहन में अगन
कवि मायूस/और 
टुकड़ों में विभक्त/उसका मन।

02.
मन-मस्तिक/निरंतर द्वंद
हो न हो, जरूर
है इनमें भी कुछ
घनिष्ठ सम्बन्ध।

03.
जिन्दगी और मौत
रेखाचित्र : स्व. पारस दासोत 
खेल रही हैं शतरंज
लगाए बैठी हैं घात
विरोधी को दें कब पटखनी
करके शय और मात

04.
चींटी से हो शुरू
हाथी बन जाती है
छोटी सी एक बात
बातों-बातों में
बे-बात बढ़ जाती है।


  •  एफ -659, कमला नगर आगरा-282005, उ.प्र./मो. 09548509508

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