समकालीन क्षणिका ब्लॉग अंक-04/367 जनवरी 2025
सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!
अशोक दर्द
01.
नदी ने मुसाफिर से कहा
यूँ बैठकर हार का मातम मत मना
अपना हौसला आजमा
मेरी तरह खुद अपना रास्ता बना।
02.
सूखे पत्ते ने कहा-
जीवन के हर रंग को प्यार कर
बसंत में इतराना मत
पतझड़ को सहर्ष स्वीकार कर।
छायाचित्र : उमेश महादोषी
03.
धीरज ने कहा हिम्मत से
मेरे साथ-साथ चल
जीवन-उपवन महक उठेगा
आज नहीं तो कल।
- गाँव घाट, डाकघर शेरपुर, तहसील डलहौजी, जिला चंबा-176306, हि.प्र./मो. 9418248262






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