समकालीन क्षणिका ब्लॉग अंक-04/360 नवंबर 2024
सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!
महेन्द्र नारायण
01.
यथार्थ को
जेब में
रखकर चलने वाले
अक्सर
खर्च हो जातें हैं
सपनों में...।
02.
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रेखाचित्र : कमलेश चौरसिया |
स्वयं को ढूँढ़ते-ढूँढ़ते
सचमुच
आज इंसान
भीड़ में खो गया है
उसका जीवन एक
मृगमरीचिका-सा हो गया है।
- श्री चन्दनलाल नेशनल कॉलेज, कांधला, जिला शामली-247775, उ.प्र./मो. 09412637489