Sunday, November 19, 2017

खण्ड-2 के क्षणिकाकार-48

समकालीन क्षणिका             खण्ड/अंक-02                   अप्रैल 2017



रविवार  :  19.11.2017

क्षणिका की लघु पत्रिका ‘समकालीन क्षणिका’ के अप्रैल 2017 में प्रकाशित खण्ड-2 में शामिल सुश्री मंजू मिश्रा जी की क्षणिका।


मंजू मिश्रा





01.

चाँदनी,
तारों के बटन लिए हाथ में,
ढूँढती रही  रात भर ...
कुरता,
चाँद की नाप का

02.

यूँ भी हो कभी 
कुछ तुम कहो न हम 
रेखाचित्र : संदीप राशिनकर 

बस मौन बोले 
और मन...
बरसों के जंग लगे 
ताले खोले 

03.

मोती होने को 
ढूँढती रही बूँद-
गोद सीप की  
और नक्षत्र स्वाति का

  •  ईमेल : manjumishra@gmail.com

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