समकालीन क्षणिका ब्लॉग अंक-04/375 मार्च 2025
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02. अविराम क्षणिका विमर्श {क्षणिका विमर्श}
रविवार : 09.03.2025
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।
सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!
भगवती प्रसाद द्विवेदी
01. होड़
जाल बिछा
दाने छिड़क
बहेलिया हो गया मुस्तैद
फिर तो लग गई
कबूतरों में होड़
हो जाएँ क़ैद!
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छायाचित्र : उमेश महादोषी |
02. गुरुदक्षिणा
आज परीक्षा हाल में
एकलव्य ने गुरु द्रोण को
अँगूठा दिखाया है
उन्हें सूर्पणखा बनाने की मंशा से
धारदार चाकू लेकर आया है।
- सर्जना, बिस्कुट फैक्ट्री रोड, मगध आईटीआई के निकट, नासरीगंज, दानापुर, पटना-801503, बिहार/मो. 09304693031
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