Sunday, February 23, 2025

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-04/373                          फरवरी 2025


क्षणिका विषयक आलेखों एवं विमर्श के लिए इन लिंक पर क्लिक करें-

01. समकालीन क्षणिका विमर्श {क्षणिका विमर्श}
02. अविराम क्षणिका विमर्श {क्षणिका विमर्श}

रविवार  : 23.02.2025
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है! 


सुनील गज्जाणी





01.


पीढ़ी-दर-पीढ़ी

सौंपती अपनी विरासत

निसंकोच

सृष्टि के जन्म से

विराम तक

अनथक, अनंत

तुम

अपने जन्म से ही

शाश्वत हो, नश्वर हो

मृत्यु !


02.


मृत्यु तुम

स्वयं का वरण कब करोगी

पता है तुम्हें?

शायद नहीं होगा

संभवतः तब

जब कोई जन्म ही

नहीं होगा

तब तुम्हारा

औचित्य कैसा!


03.


कितनी चतुराई 

छायाचित्र : उमेश महादोषी 
कितनी ख़ामोशी लिए आती हो

और, दबे पाँव लौटती  हो

जब तुम

अपना चाहा काम कर

भूचाल-सा ला देती हो

तुम मृत्यु!

  • सुथारों की बड़ी गुवाड़, बीकानेर-334005, राजस्थान/मो. 09950215557

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