समकालीन क्षणिका ब्लॉग अंक-03 /260 दिसम्बर 2022
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02. अविराम क्षणिका विमर्श {क्षणिका विमर्श}
रविवार : 25.12.2022
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।
सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!
बबिता गर्ग ‘किरण’
भुखमरी पर केन्द्रित क्षणिकाएँ
01.
उसके सपनों को जब
तोड़ नहीं पाई
भुखमरी ने
आत्महत्या कर ली।
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रेखाचित्र : के. के. अजनबी |
2.
आग में शरीर जलता है
और
भूख में आत्मा।
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