समकालीन क्षणिका खण्ड-01 अप्रैल 2016
मित्रो,
क्षणिका की लघु पत्रिका ‘समकालीन क्षणिका’ का प्रवेशांक अप्रैल 2016 में प्रकाशित कर दिया गया है। पत्रिका में प्रकाशित सभी क्षणिकाओं को इस ब्लॉग के माध्यम से इन्टरनेट के पाठकों को भी उपलब्ध करवाया जायेगा। प्रथम अंक में प्रकाशित क्षणिकाओं में से क्रमशः दो या तीन क्षणिकाकारों की क्षणिकाएँ प्रत्येक रविवार को प्रकाशित की जायेंगी। पहली कड़ी में प्रस्तुत हैं रूप देवगुण जी एवं सुधा गुप्ता जी की क्षणिकाएँ।
रूप देवगुण
01. रेगिस्तान की तपती रेत पर नंगे पाँव चलना बहुत बड़ी बात सही पर मैं हूँ कि सारे रेगिस्तान को निकला हूँ नखलिस्तान में बदलने
02. पहाड़ की बेटी है नदी पहाड़ को छोड़ने को नहीं करता है उसका मन पर क्या करे समुद्र बुला रहा है उसे बारम्बार
03. चलो चलें पहाड़ पर बैठ कर झरने के पास बिन नहाए नहा लें अन्दर तक
04. मैं बैठा हूँ चट्टान पर
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छाया चित्र : उमेश महादोषी |
05. आधी रात को सो रहे हैं सब पर समुद्र ले रहा है करवटें समझने की कोशिश करो उसके दर्द को
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