समकालीन क्षणिका ब्लॉग अंक-03/347 अगस्त 2024
सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!
वीणा शर्मा वशिष्ठ
01. प्रेम
वह प्रेम ही तो है
जो अब तक
शेष हो तुम...
मेरी स्मृतियों में।
02. शीत
![]() |
छायाचित्र : उमेश महादोषी |
शीत में
जम जाती है
प्रकृति
नहीं जमता तो प्रेम
प्रेम...
उछलता है,
गुनगुनाता है,
बहता है
एक-दूसरे के दिल में।
- 597, सेक्टर-8, पंचकूला-134109, हरियाणा/मो. 07986249984