Sunday, August 25, 2024

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-03/347               अगस्त 2024 

क्षणिका विषयक आलेखों एवं विमर्श के लिए इन लिंक पर क्लिक करें-

01. समकालीन क्षणिका विमर्श {क्षणिका विमर्श}
02. अविराम क्षणिका विमर्श {क्षणिका विमर्श}

रविवार  : 25.08.2024
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है! 


वीणा शर्मा वशिष्ठ





01. प्रेम


वह प्रेम ही तो है 

जो अब तक 

शेष हो तुम...  

मेरी स्मृतियों में। 


02. शीत

छायाचित्र : उमेश महादोषी 


शीत में 

जम जाती है 

प्रकृति

नहीं जमता तो प्रेम 

प्रेम...

उछलता है, 

गुनगुनाता है, 

बहता है 

एक-दूसरे के दिल में।  

  • 597, सेक्टर-8, पंचकूला-134109, हरियाणा/मो. 07986249984

Sunday, August 18, 2024

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-03/346               अगस्त 2024 

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रविवार  : 18.08.2024
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!


अशोक आनन





01.


पेड़ !

जिस हवा ने -

ग़रीबों के आशियाने उजाड़ने में

ज़रा भी न सोचा ।

आज

उसी हवा ने -

रेखाचित्र : कमलेश चौरसिया 
तुझे उजाड़ दिया।


02. दीया

जिसने भी-

अँधेरा जिया है

उसके लिए-

सूरज से बढ़कर

‘दिया’ है

  • 11/82, जूना बाज़ार, मक्सी, जिला शाजापुर-465106, म.प्र. 

Sunday, August 11, 2024

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-03/345               अगस्त 2024 

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रविवार  : 11.08.2024
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!  


रमा द्विवेदी





01.


रेखाओं की भी, 

होती है एक इबारत,

पढ़ सको तो पढ़ लेना।


02.


रेखाएँ!

सोच-समझ कर खींचना

ये अभिशाप भी बन सकती हैं

और

रेखाचित्र : कमलेश चौरसिया 

वरदान भी।


03.


हस्त रेखाएँ,

बताती हैं भाग्य, लेकिन

क्या कोई सच में,

इन्हें पढ़ पाया है!

  • फ़्लैट नं.102, इम्पीरिअल मनोर अपार्टमेंट, बेगमपेट, हैदराबाद-500016/मो. 09849021742 

Sunday, August 4, 2024

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-03/344                 अगस्त 2024 


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रविवार  : 04.08.2024
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!  



शशि पाधा 





01.


उसने जो खटकाई साँकल

सिहर उठा था माँ का आँचल 

माँ की गोदी सर रख कर 

न कौंधेगी, न गरजेगी

आज वो केवल बरसेगी.....


02.


तुम फूल बेचती हो 

और 

मैं मुस्कान ख़रीदने आता हूँ 

रेखाचित्र : प्रीति अग्रवाल 

मेरे पास फूलों के लिए 

रूपये नहीं 

और तुम्हारी मुस्कान की 

कोई कीमत नहीं 

तुम यूँ ही फूल बेचो 

मैं यूँ ही मुस्कान खरीदूँगा

कितना ख़ूबसूरत सौदा है न 

हमारे बीच

  • 174/3, त्रिकुटानगर, जम्मू-180012, जम्मू-कश्मीर

ईमेल : shashipadha@gmail.com