समकालीन क्षणिका ब्लॉग अंक-03/339 जून 2024
सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!
पुष्पा मेहरा
01.
रातों
करें किलोल,
शोर पर शोर
सपने हुड़दंगी
प्रताप देख सूरज का
सुबह छिप जाते
लौट-लौट आते।
02.
जठराग्नि बुझाने की
शक्ति छिपाये, अन्नदाता को
खोजते लाचार
गाँव छोड़ शहर आये हैं
शेष... बस किस्मत है।
- बी-201, सूरजमल विहार, दिल्ली-92/फ़ोन 011-22166598