Sunday, May 26, 2024

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-03/334                 मई 2024 

क्षणिका विषयक आलेखों एवं विमर्श के लिए इन लिंक पर क्लिक करें-

01. समकालीन क्षणिका विमर्श {
02. अविराम क्षणिका विमर्श {क्षणिका विमर्श}

रविवार  : 26.05.2024
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है! 


 

परमेश्वर गोयल





01.01. 


ऐसी व्यवस्था में 

हम जी रहे हैं, 

दूध बेचकर 

चाय पी रहे हैं!


02.


भेड़िया

भेड़ की 

बोली बोलता है,

चुनाव सबकी 

पोल खोलता है!


रेखाचित्र : के के अजनबी 
03.


प्रतिष्ठा बहू की 

दहेज से जुड़ी है,

वह अच्छी है 

या बुरी 

किसको पड़ी है!

  • गुलाब बाग, पूर्णिया- 854326, बिहार

Sunday, May 19, 2024

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-03/333                 मई 2024 

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रविवार  : 19.05.2024
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।

सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है! 


कंचन अपराजिता





01.


कहते हैं

‘‘प्रेम गली अति साँकरी

जामें दो न समायें’’

चलो दोनों ही 

गली में 

प्रेम को ही 

छोड़ आते हैं


02.

छायाचित्र : उमेश महादोषी 


तेरी यादें

दिल के तहखाने में

इतनी सख्त हो गईं

कि तेरे ही आँसू

उसे वहाँ से 

बहा नहीं पाये।


  • 39/1ए सिन्दूर ग्रीन पार्क, जयचन्द्रन नगर, पालीकरनाय, चेन्नई-600100, त.नाडु

(39/1, Sindur green park, Jayachandran Nagar, Pallikarnai Chennai-600100, T. Nadu)

Sunday, May 12, 2024

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-03/332                 मई 2024 

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रविवार  : 12.05.2024
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पुष्पा मेहरा




  01.


चाहा था कभी 

समुद्र में तैरूँगी 

क्या पता था-

फिर उससे उबर न पाऊँगी!!


02.

उसने अपनी ही कही 

छायाचित्र : उमेश महादोषी 

मेरी कभी न सुनी 

न ही मुझ पर विश्वास किया 

अब अपने ही हाथों 

माथे से सिर टिका 

घुमावदार सीढ़ियों पर 

धूप में बैठा तप रहा है।


  • बी-201, सूरजमल विहार, दिल्ली-92/फ़ोन 011-22166598

Sunday, May 5, 2024

क्षणिका चयन-01 : मुद्रित अंक 01 व 02 के बाद

समकालीन क्षणिका              ब्लॉग अंक-03/331                   मई 2024 

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रविवार  : 05.05.2024
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चक्रधर शुक्ल 





01.


पराली

जलाने के पहले

उसने कुछ नहीं सोचा

जलते ही

फेफड़ों को दबोचा!


02.


उनकी आँखों में 

पर्दा पड़ा है,

वायु प्रदूषण इतना बढ़ा 

उन्हें 

कुछ दिख नहीं रहा है!


03.

इस उम्र में 

इतना क्रोध,

रेखाचित्र : (स्व.) बी मोहन नेगी 

अवस्था देख कर 

लोग

नहीं करते विरोध!


  • एल.आई.जी.-1, सिंगल स्टोरी, बर्रा-6, कानपुर-208027(उ.प्र)/ मो. 09455511337