समकालीन क्षणिका ब्लॉग अंक-03 /186 जुलाई 2021
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02. अविराम क्षणिका विमर्श {क्षणिका विमर्श}
रविवार : 25.07.2021
‘समकालीन क्षणिका’ के दोनों मुद्रित अंकों के बाद चयनित क्षणिकाएँ। भविष्य में प्रकाशित होने वाले अंक में क्षणिकाओं का चयन इन्हीं में से किया जायेगा।
सभी रचनाकार मित्रों से अनुरोध है कि क्षणिका सृजन के साथ अच्छी क्षणिकाओं और क्षणिका पर आलेखों का अध्ययन भी करें और स्वयं समझें कि आपकी क्षणिकाओं की प्रस्तुति हल्की तो नहीं जा रही है!
सुशीला जोशी
01.
पनिहारिने
शहर चली गयीं
और तड़प उठा
गाँव का पनघट।
02.
सूखी लकड़ी
स्वयं जलकर
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रेखाचित्र : राजेंद्र परदेसी |
करती है मुकाबला
कड़कड़ाती ठंड का।
03.
अपने में जल समेटकर
रखने वाला घड़ा
तैरता है जल में
खुद रीत कर।
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